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श्री हरि वंदना के भक्तिरस से सराबोर हुई कल्पकथा की 261वीं काव्यगोष्ठी

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार सोनीपत द्वारा श्री कामिका एकादशी के पावन अवसर 261वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन भक्ति काव्य श्री हरि वंदना विषय पर संपन्न हुआ।

संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह की सूचना के अनुसार काव्य गोष्ठी का प्रभावशाली संचालन भास्कर सिंह माणिक ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मीरा परिहार ‘मंजरी’ ने की, जबकि प्रेमलता कुमारी ‘पुष्पेश’ ने मुख्य अतिथि का दायित्व संभालते हुए आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के मंगलाचरण से हुआ। वंदना के पावन स्वरों ने आभासी मंच को भक्तिरस से आप्लावित कर दिया और इसके पश्चात भक्ति काव्य श्री हरि वंदना के अंतर्गत काव्य-सृजन की सरिता प्रवाहित हुई। जिसमें मनोज कुमार गुप्ता ‘मंजुल’, दुर्गादत्त मिश्र ‘बाबा’, मीरा परिहार ‘मंजरी’, प्रेमलता कुमारी ‘पुष्पेश’, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, भास्कर सिंह माणिक, विजय रघुनाथराव डांगे, शोभा प्रसाद, सांद्रा लुटावन गणेश, ज्योति प्यासी, दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने अपनी-अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से श्रीहरि की भक्ति, महिमा और शरणागति के विविध भावों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की।

दो चरणों एवं चार घंटों तक चले इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा कल्पकथा संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा द्वारा गुजरात के खेड़ा जिले में स्थित डाकोर जी के दाउजी मंदिर में विराजमान भगवान बलभद्र के दिव्य दर्शन करवाने का जिससे देश विदेश से जुड़े भक्त जनों का भक्ति भाव से हृदय गदगद हो गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के संदर्भ में हुआ यह राष्ट्रगान-सदृश भावपूर्ण गायन आयोजन की आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्रभक्ति के स्वर से जोड़ गया। इसके उपरांत राधा श्री शर्मा ने आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति हृदयपूर्ण आभार व्यक्त किया। अंत में सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगलमय शांति-पाठ के साथ 261वीं कल्पकथा साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी को विश्राम प्रदान किया गया।

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