
रफ्ता रफ्ता सी रफ्ता रफ्ता से गुजर रही यह बावड़ी सेट लाती से बलखाती सी यह जिंदगी कभी उतार देती कभी चढ़ाओ कभी धूप में तपिश कभी छांव से ठंड पर अपने ही मौजों में बह के ले जाती है जिंदगी कभी अलसती से दोपहर ऋषि कभी भर सी कभी उजली सी कितने जीवन के रंगों से रूबरू कराती है यह जिंदगी जब तक सांसों में सांस है बाकी तब तक पाल-पाल जीने का जज्बा सिखाती है जिंदगी रफ्ता रफ्तार से गुजर रही है यह हमारी तुम्हारी अलबेली सी नखरेली सी जिंदगी स्वरचित रचना बढ़िया













