
स्कूल शिक्षा का मंदिर है जहां बरसात में भीगी भीगी दीवारों पर भरोसा नहीं,
स्कूल में सूखे कमरे नहीं, टपकती छतों से पानी टपकते थमता नहीं,
जर्जर खस्ता दीवारों से डर लगता है,
मौसम सुखा है तो कमरों से
बाहर बैठना है बच्चों को ,
कभी टीचर नहीं, तो कभी पढ़ाई नहीं।
किचन, मध्याह्न भोजन योजना में,जन गणना और कई योजनाओं में लगाएं रखतें हैं ,
अध्यापक जी को,
इसलिए समय पर पूर्ण शिक्षा नहीं,
अस्पताल में मरीजों को समय पर डाक्टर नहीं,
कहीं बाबू नहीं तो कहीं क्लर्क नहीं ,
दुःख इस बात का कहिं भी शुद्ध दुध किराना,सामान तेल मसाले नहीं,
इन्द्र देव नाराज हो गए हैं,
इसलिए समय पर बरसात भी नहीं हुई है।।
अब बरसात में पानी ही पानी से स्कुल के चारों तरफ,
स्कूल तालाब बना, बाहर
निकलने का रास्ता नहीं।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













