
सावन की हरियाली में सब झूम उठे हैं।
कोकिल के मधुर स्वर बागों गूंज उठे हैं।।
नीले पीले लाल गुलाबी फूल खिल उठे हैं।
भोलेनाथ के मंदिर भी मंत्रों से गूंज उठे हैं।।
धरती पर पानी की बूंदे पाकर मयूर नाच उठे हैं।
पोखर में दादुर टर्र – टर्र करते जाग उठे हैं।।
शिव जी के भजनों पर नर नारी झूम उठे हैं।
सड़कों पर देखो कावड़ यात्री नाच उठे हैं।
सोई युवा पीढी में अब संस्कार जाग उठे हैं।
सनातन के जयकारे घर- घर गूंज उठे हैं।।
शिवजी के मंदिर देखो ,सारे सज उठे हैं।
ॐ नमः शिवाय के जयकारे गूंज उठे हैं।।
बादलों की गड़गड़ाहट से सब कांप उठे हैं।
सावन की बारिश से मन मयूर नाच उठे हैं।।
सावन में देखो,प्रकृति के रंग निखर उठे हैं।
प्रेम की फुहारों से अंतर्मन भी जाग उठे हैं।।
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
भवानीमंडी













