
वसुधा को हम स्वर्ग बनाएँ,
आओ मिलकर अलख जगाएँ!
भाँति-भाँति के वृक्ष लगाकर,
हम सब पर्यावरण बचाएँ!!
पेड़ कभी कटने न पाए,
होना भूस्खलन, बचाएँ!
पर्यावरण प्रदूषित न हो,
ऐसा सब में भाव जगाएँ!!
वसुधा को हम स्वर्ग बनाएँ,
आओ मिलकर अलख जगाएँ!
बाग-बगीचे, वन-उपवन से,
वसुधा का शृंगार रचाएँ!
वर्षा जल को संचित करके,
धरती की हम प्यास बुझाएँ!!
वसुधा को हम स्वर्ग बनाएँ,
आओ मिलकर अलख जगाएँ!
जल, वायु व ध्वनि प्रदूषण ,
से अब हम सब मुक्ति पाएँ!
उत्सर्जित न करें कार्बन,
ओजोन परत को सुदृढ बनाएँ!!
वसुधा को हम स्वर्ग बनाएँ,
आओ मिलकर अलख जगाएँ!
निहित स्वार्थ से ऊपर उठकर,
‘जिज्ञासु’ जनहित लग जाएँ!
जागृत करके जन-मानस को,
हम अपना कर्तव्य निभाएँ !!
वसुधा को हम स्वर्ग बनाएँ,
आओ मिलकर अलख जगाएँ!!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’













