
15 अगस्त 1947 की,
वह भोर निराली थीl
जब भारत मां ने,
आजादी की सांस,
पहली बार संभाली थीl
सदियों की बेड़ी टूटी,
आजादी की भोर हुई l
गुलामी की लंबी रात गई,
नव प्रभात की बेला आई l
वीरों के बलिदानों से सजा,
भारत माता का श्रृंगारl
तीन रंग का तिरंगा हमारा,
इसमें समृद्धि का है वास l
केसरिया बलिदान सिखाए,
वीर हमें यह बात बताएं l
सफेद रंग शांति लाता,
सबका मन यह हर्षाता l
हरा रंग हरियाली लाए,
देश की खुशहाली बढाये l
बीच में है चक्र महान,
जो गति का है वरदानl
तिरंगा जब नभ में लहराए,
भारत माता की जय जय से,
गूंज उठा सारा हिंदुस्तानl
वंदे मातरम! का स्वर गूंजे
पुलकित हो हर इंसान l
जन- गण- मन की स्वर- लहरी में,
झूम उठे अपना हिंदुस्तान l
तिरंगा केवल ध्वज नहीं,
यह वीरों का सम्मान,
इसके नीचे एकजुट होकर,
गढ़े नया हिंदुस्तान l
न कोई मन में भेद रहे,
न कोई दिल में दूरी,
एकता का दीप जलाकर,
करें देश की सेवा पूरी l
जब तक सूरज चांद रहेगा,
तब तक इसका मान रहे,
भारत माता के चरणों में ही,
अपना सारा सम्मान रहे l
वंदे मातरम! जय हिंद!
पूनम कुमारी
मधुबनी बिहार












