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लहू से लिखी आजादी

लहू से लिखी आज़ादी की दास्ताँ, वीरों की अमर निशानी है।
बलिदानों से सजी हुई, भारत माँ की यही कहानी है।।

जिनके साहस से तिरंगा, नभ में आज लहराता है,
उनके त्याग का दीपक, हर दिल में जगमगाता है।

हँसकर फाँसी चढ़ गए, मातृभूमि के रखवाले,
भारत माँ के लाल थे वे, दिल के बड़े निराले।

सीने पर गोली खाकर भी, कदम नहीं वे डिगने दिए,
आजादी के सपनों को, कभी नहीं मिटने दिए।

मिट्टी में मिलकर भी वीरों, अमर हुए संसार में,
उनकी गाथा गूँज रही, भारत के हर द्वार में।

किसानों, मजदूरों ने भी, अपना योगदान दिया,
नारी शक्ति ने बढ़-चढ़कर, रण में सम्मान लिया।

भगत, सुभाष, आज़ादों की, गाथा कौन भुलाएगा,
गाँधी के सत्य-अहिंसा पथ को, कौन मिटा पाएगा।

लहू से लिखी यह दास्ताँ, हमें सदा समझाएगी,
देशप्रेम की ज्योति हर पीढ़ी के मन में जलाएगी।

आओ मिलकर शपथ करें, देश सदा ऊँचा रखें,
वीरों के सपनों का भारत, मिलकर हम सच्चा रखें।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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