
आजादी की पहचान तिरंगा, तीन रंग सोहता।
तीन रंग की पट्टी सजी, केसरिया ऊपर मोहता।।
साहस त्याग बलिदान भरे, मध्य श्वेत शांति प्रतीक।
हरा रंग सबसे नीचे, समृद्धि हरियाली है शरीक।।
बिश्वास मन में जगाता, चौबीस तीलियों का चक्र।
अशोक चक्र हमे सिखाता, चलना कभी न वक्र।।
नित्य रहें गतिशील हम, बढ़ते जाते सेनानी।
आँख उठा कर देखे जो दुश्मन, देते उनकी कुर्बानी।।
राम कृष्ण की ये धरती, बना हिमालय सरकार।
गंगा धारा इससे निकली, धोती चरण पखार।।
सैनिक सीमा पर हैं खड़े, बंदूकें अपनी तान ।
मर जाएँ मिट जाएँ, झुकने न देंगे शान।।
झेली बहुत ग़ुलामी हमने, रखना इसका मान।
केतु हमारा झुकने न पाए, रखना इतना ध्यान।।
लोग चाहते जो देश बाँटना, देना मत उनका साथ।
रखो याद कुर्बानी वीरों की, पकड़ चले सब हाथ।।
ज़ेन जी के नाम पर जो, करवाते दंगा देश में।
बच कर रहना उनसे तुम, छुपे विद्रोही वेश में।
सत्ता पाना मकसद उनका, करते चक्का जाम।
देश हित की बातें सोचो, चलो तिरंगा थाम।।
जय हिन्द, जय भारत
अंजलि किशोर “कृति”













