
देश के हेतु निज सर्वस्व दियो,
तजि चैन कियो कर्तव्य महान।
वर्दी तजी, जज़्बा वही, राख्यो
सीस पे गर्व को ताज समान॥
धीमे चले पग, हुये केस सफेद,
पर ज्ञान की ज्योति करे उजियार।
अनुभव के खजान, जीवन आदर्श,
नमन करत हैं सबै बारम्बार॥
धन्य वो वीर वरिष्ठ सबै
जिनसे या जग में मान बढ़्यो,
त्याग तपस्या से सींचा है देश,
आदर से शीश सदा ही झुक्यो॥
पहली साँस से अंत तलक दीन्हों सबै,
अब देश की सेवा में जीवन बीत्यो,
आदित्य आप ही से ये जग आज,
येहि कारण भारत मस्तक ऊँच्यो॥
वरिष्ठ जनन दिवस की शुभ कामना,
प्रेम और सेवा संग-संग रहे।
स्वस्थ रहो, मुस्काते रहो मुख,
आशीष सदैव संग-संग रहे॥
आपसे सीखा जीने का है ढंग,
अनुशासन और सम्मान बड़ो,
शत कोटि नमन उन चरणन को,
आदित्य जिनसे ये देश महान खड़ो॥
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













