
ये धागा केवल धागा नहीं,
ये विश्वास का विस्तार है,
बहन की आँखों का स्नेह है,
भाई के हृदय का संकल्प अपार है।
ये कलाई पर बँधता है,
मगर रिश्ता आत्मा से जुड़ जाता है,
एक छोटी-सी राखी के स्पर्श से
पूरा बचपन आँखों में उतर आता है।
वो नन्ही-सी उँगली पकड़कर
चलना सिखाने वाला भाई,
वो अपनी गुड़िया छोड़कर
भाई की पतंग सँवारती बहन।
वो छोटी-छोटी बातों पर रूठना,
फिर पलभर में मान जाना,
वो छुप-छुपकर मिठाई खाना,
और माँ से शिकायत करके
फिर एक-दूजे को बचाना।
कभी खिलौनों पर होती थी लड़ाई,
कभी चॉकलेट पर अधिकार,
मगर मुसीबत की आहट आते ही
एक-दूजे के लिए
खड़े हो जाते थे दोनों दीवार।
राखी का अर्थ केवल
भाई की कलाई पर बँधा सूत्र नहीं,
यह बहन के विश्वास की वह डोर है
जिसकी कोई सीमा नहीं।
भाई केवल रक्षक नहीं,
बहन भी उसकी शक्ति होती है,
उसकी हर सफलता के पीछे
बहन की दुआओं की
अदृश्य ज्योति होती है।
बहन घर की मुस्कान है,
माँ के आँचल की मधुर कहानी है,
भाई के बचपन की साथी है,
और जीवन की सबसे सुंदर
अनमोल निशानी है।
रक्षा केवल बहन की नहीं—सम्मान हर नारी का होना चाहिए,
हर घर की बेटी को
निर्भय होकर जीने का अधिकार होना चाहिए।
ऐसा समाज बनाएँ हम,
जहाँ कोई बहन भयभीत न हो,
जहाँ उसकी उड़ान पर
किसी बंदिश का पहरा न हो।
राखी का पावन पर्व
तभी सार्थक कहलाएगा,
जब हर भाई अपनी बहन के साथ
हर बेटी का सम्मान निभाएगा।
कुछ बहनें आज दूर हैं,
कुछ भाई परदेस में हैं,
किसी की राखी डाक से पहुँचेगी,
किसी की यादें संदेश में हैं।
किसी कलाई पर राखी होगी,
किसी कलाई को इंतज़ार रहेगा,
मगर प्रेम का यह पावन बंधन
हर दूरी के पार रहेगा।
बहन जब राखी बाँधती है,
तो केवल मंगलकामना नहीं करती,
वह अपने भाई की लंबी उम्र से भी आगे
उसके जीवन में
सद्बुद्धि, संस्कार और उजाला भरती है।
भाई जब बहन का हाथ थामता है,
तो केवल रक्षा का वचन नहीं देता,
वह कहता है—
तेरी हर खुशी में मेरी खुशी है,
तेरा सम्मान ही मेरा सम्मान है,
तेरी मुस्कान मेरे जीवन का अभिमान है।
आओ आज प्रण करें—
रिश्तों में फिर से अपनापन जगाएँगे,
राखी के इस पावन पर्व पर केवल उपहार नहीं,
एक-दूसरे को समय और सम्मान देंगे।
न कोई अहंकार रहे,
न मन में कोई मलाल रहे,
भाई-बहन का यह रिश्ता सदा प्रेम से मालामाल रहे।
कलाई पर बँधा यह सूत्र
सदैव हमें याद दिलाए
रिश्ते रक्त से बनते होंगे,
मगर प्रेम और विश्वास से जीवन भर निभाए जाते हैं।
राखी का धागा छोटा है,
पर इसमें संसार समाया है,
बहन की ममता, भाई का संबल,
बचपन का हर त्योहार समाया है।
ये केवल एक पर्व नहीं,
रिश्तों का पावन उत्सव है,
ये केवल कलाई का आभूषण नहीं,
जीवन भर के विश्वास का उत्सव है।
जहाँ बहन की आँखों में
भाई के लिए दुआ रहे,
जहाँ भाई के हृदय में
बहन के लिए सम्मान रहे—
वहीं सच्चा रक्षाबंधन है,
वहीं प्रेम की पहचान है।
आओ मिलकर कहें—
राखी केवल धागा नहीं,
विश्वास की अमिट निशानी है।
भाई केवल नाम नहीं,
बहन की शक्ति और अभिमान है।
बहन केवल रिश्ता नहीं,
घर-आँगन की मुस्कान है।
और रक्षाबंधन केवल पर्व नहीं—
भारतीय संस्कृति की आत्मा में बसा
प्रेम, मर्यादा और सम्मान है।
जय हो भाई-बहन के पवित्र प्रेम की!
जय हो भारतीय संस्कृति की!
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌸🙏
स्वरचित एवं मौलिक
✍️धर्मेंद्र कुमार राठौर 🌹
व्याख्याता भौतिक विज्ञान
जिला झालावाड़ राजस्थान












