
जो बीत गया, उसे जाने दो
जो बीत गया, उसे जाने दो,
खुशियों को फिर से आने दो।
भविष्य की चिंता में न तिल-तिल जलो,
वर्तमान को सुखद बनाने दो।
बीते कल की सीख को साथ रखो,
मन में आशा का दीप जलाने दो।
जो मिला है, उसका मान करो,
जीवन को हँसकर मुस्कुराने दो।
कल की चिंता कल पर छोड़ दो,
आज को अपने रंग में ढलने दो।
हर पल अनमोल है जीवन का,
इसे प्रेम से सजने-सँवरने दो।
जो खो गया, उसका शोक न करो,
नई सुबह को दस्तक देने दो।
मन के आँगन में खुशियाँ भरकर,
जीवन को फिर से खिलखिलाने दो।
डॉ पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश













