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कविता

आखिरी दिन भी रही प्रचार की धूम,
अब वो घर घर जाकर जन संपर्क कर रहें हैं,
घर पर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं,
खुद उनके दिल में जगह बना रहे हैं ,
रूठों को मना रहे हैं,

मतदान केंद्रों पर पड़ेंगे वोट, प्रत्याशीयों के भाग्य का फैसला करेंगे वोट,

प्रचार थमा तो फिर घर घर दस्तक शुरू रही,

गली गली में
उम्मीदवारों की और समर्थकों की भीड़ लगी रही,

कहीं परिवार एक, मतदान के लिए वार्ड अलग अलग दिखे,
तो कहीं पत्नी का नाम मतदाता सूची से गायब दिखे,

मतदान में मतदाता रहे मौन,
प्रतिक्रिया जताएं बिना ही आते जाते रहे,
नगर पालिका के वार्डों की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही ,
दिन भर मतदान के लिए कतारें लगी रहीं,

कहीं नगर पालिका क्षेत्र में पहली बार वोट डाले ,
स्काउट गाइड के लड़के दिव्यांग को बुथ पर ले जाते हुए देखा गया, तब कहीं जाकर वोट डाले,

कहीं किचड़ ने रोका मतदाताओं का रास्ता,

तो कहीं गिट्टी डाल कर मार्ग बनाया गया,

शहर की सरकार चुनने का दिखा उत्साह,

बुजुर्गों ने भी डाला वोट,
सुबह से ही कतार में लगे रहे ,
दूर शहरों से भी पहुंचे लोगों ने,
इस पर्व को मनाया गया,

मेरा वोट मेरा अधिकार है ,
हितों की रक्षा करना ही धर्म है, अधिकार है।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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