
मेरी माता
मेरी माता आने वाली, सुंदर पाट लगाओ रे।
डोल नगाड़े बजे शान से, पथ में फूल बिछाओ रे।।
बड़े दिनों में आई माता, चरणों में बिछ जाओ रे।
अंतर्मन की खिड़की खोलो, दोडो द्वार सजाओ रे।।
ये असुर का संहार करती,भक्तों की हितकारी है।
ऊंचे पर्वत निवास करती, करती सिंह सवारी है।।
चौसठ जोगनी आगे चले, बावन भेरू भारी है।
माता कीआभा से चमकेये त्रिलोक सृष्टि सारी है।।
आओ सारे मिलकर गाओ,गीत मीठे सुनाओ रे…
माता दुर्गा के नव रूप हैं, रूप सब कल्याण कारी।
सारे वांछित फल पाते हैं, जोभी भजते नर नारी।।
आदिशक्ति का रूप मनोहर,भला और मंगलकारी।
जग जननी है मेरी माता ,कष्ट दूर करने वारी।।
स्वागत में मेरी माता के,रंग गुलाल उड़ाओ रे….
गीतकार मनोहर सिंह चौहान मधुकर










