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रंगों में छुपा विनाश

आर. एस. लॉस्टम

रंग जब मिलने लगे रंग में,
आसमान जब पिघलने लगे,
समझो — इतिहास बदलने वाला है।

धरती जब प्यास से तड़पने लगे,
नदियाँ अपनी राह भटकने लगे,
समझो — प्रलय का प्रकोप नज़दीक है।

सागर जब रूप बदलने लगे,
उल्लू अगर दिन में जागने लगे,
तो समझो — विनाश बिलकुल पास है।

इस रंग बदलती दुनिया की रंगतें अनेक हैं,
कभी मुश्किल बन जाती हैं मंज़िलें, कभी रास्ते सख़्त हैं।
लोगों के जीने का ढंग यहाँ निराला है,
जहाँ झूठों का बोलबाला है, और सच्चों का मुँह काला है।
आर एस लॉस्टम

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