
लिखने को मन करता है–
जब इस जग चिड़ियां चहचहाएं
जब धरा पर
सुख की आस हो
क्या कहें
और क्या लिखें
अगर
चल रही हों आंधियां
तूफ़ान से भरा आकाश हो
लोगों के
चेहरे उदास हो
चारों तरफ जो भी मिला बदहवास वो।
शांत कैसे रहें
झूठ और ताकत का नशा बरस रहा
सत्य को पाने के लिए
अंतहीन अंधकार
इंसान को डस रहा ।
धर्म पर
तुफां बन कर
ये वक्त बिन बादल बरस रहा।
आज इंसा को !
किसी अनहोनी का डर
उसके जहन को डस रहा
जिंदगी में
सुकून को पाने को
इंसा तरस रहा ।
महेश शर्मा, करनाल










