
हुई रोशन मेरी गलियां
मेरे सरकार आए हैं,,2
सजा दो घर को गुलशन सा, 2
लगी कुटिया भी दुल्हन सी,,
मेरे सरकार आए हैं,,2
हुई है, क्या खुशी मुझको
ये कहना ही तो मुश्किल है,2
खिला है आज मेरा तन मन,,
मेरे सरकार आए हैं,,
सजा दो घर को गुलशन सा,,2
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
मेरे सरकार आए हैं2
कहूं किस-किस को में जाकर,,
मेरे दिल के ख्यालों को
मिला है आज ये सावन
हर कली मुस्कुराई है,,,
सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं2
लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे सरकार आए हैं2
ताजुब है जमाना ये,
देख कर मेरी शोहरत को2
मेहरबा है गुरु मुझ पर,
मेरे सरकार आए हैं,,
सजा दो घर को गुलशन सा,,2
मेरे सरकार आए हैं,
लगे कुटिया अभी दुल्हन सी,2
मेरे सरकार आए हैं,,2
शुक्रिया है आप सबका
सभी ने इनको माना हैं2
हुई महफिल आज रोशन
मेरे सरकार आए हैं,,,2
सजा दो घर को गुलशन सा,,
मेरे सरकार आए हैं2
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,,2
मेरे सरकार आए हैं,,2
सजा दो घर को गुलशन सा,,2
मेरे सरकार आए हैं,,,2
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश












