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इंडोनेशिया में चली कलम रूपी पिचकारी


इंदु नांदल जी 30 वर्ष से अधिक समय से इंडोनेशिया में रह रही हैं और वे ‘वंदे मातरम परिवार ‘ की संस्थापक हैं । इंदु जी पेशे से अध्यापिका हैं और देश पर लिखना शौक नहीं बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी समझती हैं इसलिए उन्होंने भारतीय धरोहर पर 5 विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं ।
होली के पर्व पर उन्होंने इंडोनेशिया में महिला काव्य मंच की काव्य गोष्ठी का आयोजन किया ।आ नरेश नाज़ जी महिला काव्य मंच के संस्थापक हैं और इंदु नांदल महिला काव्य मंच की इंडोनेशिया की अध्यक्ष हैं ।
काव्य गोष्ठी का आरम्भ इंदु जी ने सरस्वती वंदना गाकर किया । उन्होंने सरस्वती वंदना जापानी काव्य विधा ‘ हाइकु ‘में लिखी थी ।होली के विषय पर दोहे , ग़ज़ल,गीत ,हाइकु जैसी विधाओं में विश्व भर से जुड़े कवियों- कवयित्रियों ने मन को छू जाने वाले रंग बिखेरे।
आदरणीय नरेश नाज़ जी के साथ सीमा शर्मा जी व निशा गुप्ता जी भारत से जुड़े ।
ऑस्ट्रेलियाई से भावना कुँवर जी व प्रगीत कुँवर जी , दुबई से अमृत बिसारिया जी , ताइवान से भावना श्रीवास्तव जी ,इंडोनेशिया से इंदु नांदल जी ,नीता सरोजनी जी,जोगिंदर कौर जी,प्राची गर्ग व गीता सेठ जी जुड़े ।
इंदु जी ने कहा गुलाल तो धोने से उतर जाता है पर जो रंग कलम रूपी पिचकारी से निकलते हैं वो शरीर को नहीं असंख्य आत्माओं को पावन रंगों में आजीवन के लिए रंग देते हैं जो पीढ़ियों तक रंग नहीं छोड़ते , ये रंग हैं सत्य,अच्छाई,भक्ति व प्रेम के ।
सभी को होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ॥
इंदु नांदल विश्व रिकॉर्ड होल्डर
इंडोनेशिया

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