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रंगों का मिलन

​मोहब्बत के गुलालों से नया एक सिलसिला कर दें,
चलो हम आज नफ़रत को दिलों से अलविदा कर दें।

​पुरानी रंजिशें सारी हवा में घोल देते हैं,
अदावत के हर एक पन्ने को आज हम जुदा कर दें।

​तुम्हारे गाल पर गुलाल की लाली सजी देखो,
हँसी की गूँज से इस फ़िज़ा को भी खुशनुमा कर दें।

​न कोई गैर हो अपना, न कोई फासला बाकी,
गले लगकर हर एक शिकवे को आज हम फना कर दें।

​न रंगों का कोई मज़हब, न खुशबू की कोई सरहद,
चलो इस होली पर हम प्यार को ही बस खुदा कर दें।

रीना पटले, शिक्षिका
जिला सिवनी मध्यप्रदेश

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