
खुशी के रंग बरसे, होली खुशियों का त्योहार ।
आज वैर-विरोध भुला कर प्रकट करें मनोद्गार।
खुशियों का तौफा मिले ये ही सर्वोत्तम उपहार।
गायें झूमें सब गीत सुनाएं, बांटें प्रेम उपहार ।
ढोल नगाड़े की थाप पर नाचे बीच बाजार।
छोटे बड़े जहां भी देखो रंग से मिलें सरोबार।
सब खुशी में डूबे आज मिले छोड के कारोबार।
लाल गुलाल उड़े ,बंटे खुशियें हजारों-हजार।
देश मेरा अलबेला खुशियें मने यहां साथ-साथ।
जिसको देखो रंग रगे जैसे मस्ताने चले बारात।
बच्चों की क्या पूछो रंग पिचकारी उनके हाथ ।
होलाष्टक बीत गए हों रिश्तों के मुहूर्त दिन रात
महेश शर्मा, करनाल










