
सुना सखी फागुन बा आइल
हो सुना सखी फागुन बा आइल
सरर सररर बहे पुरवाईया के झोंका
केहू न रोका अब केहू न टोका
हवा के मस्ती अबीर गुलाल
उड़े ला गुलाल जैसे बदरा के झोंका
सुना सखी फागुन बा आइल …
बाजे मृदंग और बाजे मंजीरा
भीजे चुनरिया और और भीजे शरीरा
होरी क हुड़दंग और ढोलक क थाप
और धम धम बाजेला ढोलक के घेरा
सुना सखी फागुन बा आइल ….
भाभी और देवर के खूब ठिठोली
देवर के हथवा में रंगवा की झोली
हस हस रोके ऊ घाटी और रस्ता
भाभी भी भीजे,अब सूझे न रस्ता
सुना सखी फागुन बा आइल ….
बिरहन की पीर सतावे सांवरिया
सब घर लौटे परदेशी बलमुआ
कइसे कटे अब फागुन के दिनवा
बाट जोहत बाटे कजरारी अखियां ।।
सुना सखी फागुन बा आइल की सुना सखी फागुन बा आइल
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश










