
पराए व्यक्तियों को नमन करो
और प्रेम से बातचीत करो
उनकी बातों पर ध्यान करो
रिश्तेदार की तरह पूजा करो
अतिथि को सत्कार श्रेष्ठ कार्य
अतिथि को सत्कार
सब का संस्कार
इससे मिला व्यवहार
सब का परोपकार
अतिथि को गौरव देना है
भक्ति भाव को दिखाना
प्रेम भाव को बांटना
स्नेह भाव को बरसाना
रिश्तेदार भाव से देखना
क्योंकि अतिथि ईश्वर है
श्रीनिवास यन,आंध्रप्रदेश










