
प्रभु ने गर भेजा है मुझको,
अस्तित्व मिटा सकता है कौन?
मैं ना रहूं तो दुनिया ना हो,
बस, मानो सत्य रहो मौन।
बड़े बुजुर्गों का कहना है
बेटा होता बड़े भाग्य से,
एक बात यह भी बोले हैं,
बेटी है होती “सौ-भाग्य” से।
मैं तो घर की फुलवारी हूं,
मात पिता को होती प्यारी।
मैं ना रहूं तो वंश ना चले,
फिर भी सबको लगती भारी??
नानी जो ना होती तो, फिर
तुम कैसे होती मेरी मां?
अब सोचो और फिर बतलाओ,
क्या ले सकोगी मेरी जान??
सुलेखा चटर्जी










