
नारी तू महान है
तू जग की पालनहार है
तू न होती तो जग का कल्याण नही होता
तू ही दुर्गा है तू ही काली है
तू ही जगदम्बा है
तू ही नारायणी है तू हीअष्टभुजा वाली
तू ही नव निधियों वाली है
तू ही है जो तेरे अनेको रूप है
तू ही जब क्रोध मे आती धरती,आकाश,पाताल एक हो जाते
तू ही मनुष्य के प्राण तारती
तू ही अपने पति अपने बच्चो पर कोई आंच नही आने देती
तू ही एक ऐसी नारी है जिस के बिना जीव जन्तु ,प्राणी,मनुष्य दुनिया नही देख पाता
तू महान है नारी तू महान है तेरे लिए जितना लिखू उतना कम है
जय हिंद जय भारत
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला “अमन” सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र










