
नारी केवल नाम नहीं,
जीवन की मधुर पहचान है।
अंधेरों में जो दीप जले,
वह साहस की मुस्कान है।
ममता जिसकी गहरी नदी,
हिम्मत जिसका आकाश है।
कदम बढ़ाए जो आगे,
उसके संग हर विश्वास है।
रुकती नहीं तूफानों से,
हर मुश्किल से लड़ जाती है।
नारी जब अपने स्वर में बोले,
नई सुबह बन जाती है।
महिला दिवस बस याद दिलाए,
तुम शक्ति हो, सम्मान हो।
तुमसे ही जग रोशन है,
तुम जीवन की मुस्कान हो।।
मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)










