
नारी,तु हो नारायणी ,
माँ हो,तु हो कल्याणी ।
हो तु जगत जननी,
सबो की,आनंददायिनी ।
तेरे हर रूपों की कहानी,
देखे है,और है सुनी ।
माँ रूप मे ममतामयी बनी,
बहन बनी तो, रक्षकवाहिनी ।
सुता रूप मे आनंददायिनी ।
तो बनी कभी तु,अर्द्धांगिनी ।
सब रूपों मे ,छायी तु,
हर रूप मे,भायी तु ।
तेरे ही से सृष्टि बनी,
यही तेरी है,कहानी ।
आधी आबादी तेरी भी है,
सभी जगह मे,अब तु भी है ।
गाड़ी के पहिये के समान ,
तेरी बनी है,अब पहचान ।
एक के बिना दूजे का काम,
रूक जाती है,ये लिये मान ।
आदरणीया,पूजनीया बनी,
नमन करे,तुझे सभी ज्ञानी ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड










