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नारी

सृष्टि का मूल रूप स्त्री
जन्म देनेवाली पवित्र स्त्री
सभी को प्रेम दिखानेवाली स्त्री
विरोधों को खंडन करती स्त्री।

गृहिणी के रूप कार्य करती है
आज कल नौकरी भी करती है
धैर्य शाली , सहनशीली होती है
अपनी कुटुंब गौरव बचाती है।

मातृभूर्ति और करुणामयी है
अधिष्ठात्रीदेवी के रूप प्रसिद्ध है
स्त्री लक्ष्मी देवी के समान होती है
स्त्री पढ़ाई घर की भलाई होती है।

जहां स्त्री की पूजा करती है
वहां समाज भी उन्नति होती है
जैसे स्त्री अबला नहीं होती है
वैसे समय से सबला बनती है।

श्रीनिवास एन,आंध्रप्रदेश
साहित्यकार

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