
नारी शक्ति को नमन
नारी शक्ति को नमन, बेटी बन मुस्काए।
लक्ष्मी बनकर जो सदा खुशियों संग लाए॥
पिता के सपनों की वह उजली पहचान।
उसकी हँसी से महके सारा कुल-आँगन॥१॥
नारी शक्ति को नमन, बहना स्नेह अपार।
राखी के पावन धागों से जोड़ती परिवार॥
संकट की हर घड़ी में देती हिम्मत साथ।
प्रेम भरा हृदय सिखलाता सच्ची बात॥२॥
नारी शक्ति को नमन, पत्नी रूप महान।
सुख-दुख की हर घड़ी में देती सदा साथ॥
अपने सपनों को वह अक्सर भूल जाती।
परिवार की खुशियों में सदा मुस्काती॥३॥
नारी शक्ति को नमन, माँ का रूप विशाल।
अपने आँचल में रखती सारा जगत निहाल॥
ममता की छाया से हर दुःख दूर भगाती।
प्रेम और संस्कार से जीवन राह दिखाती॥४॥
नारी शक्ति को नमन, गुरु बनकर देती ज्ञान।
नारी वही शक्ति है, जो हरती सब अज्ञान॥
संस्कारों की ज्योति से जीवन राह दिखाती।
सत्य और सद्गुण का दीप सदा जलाती॥५॥
नारी शक्ति को नमन, कर्मभूमि की शान।
मेहनत, ज्ञान, साहस से बढ़ाए सबका मान॥
शिक्षा, सेवा, विज्ञान में रचती नई कहानी।
आज की नारी बन रही जग की नई निशानी॥६॥
नारी शक्ति को नमन, साहस की पहचान।
संघर्षों की राह में पाती ऊँचा सम्मान॥
आँधी और तूफानों से कभी नहीं घबराती।
हिम्मत की मिसाल बन सबको राह दिखाती॥७॥
नारी शक्ति को नमन, सेवा की मिसाल।
प्रेम,दया,करुणा से रखती सबका ख्याल।
नारी धरती पर ईश्वर की छाया बनती।
हर प्राणी के जीवन में खुशियाँ ही भरती॥८॥
नारी शक्ति को नमन, जीवन की यह शान।
ममता, करुणा, प्रेम से करती जग कल्याण।
उसके आँचल की छाया शीतल चाँद समान।
उसके बिना अधूरा है यह जग और प्राण॥९॥
मातृ शक्ति है, इस सृष्टि का मूल आधार।
नारी से ही जीवन खिला, नारी से संसार॥
नारी से मिलता है, मानव को नव जीवन।
वंदन,अभिनंदन— नारी शक्ति को नमन॥॥१०॥
योगेश गहतोड़ी “यश” (ज्योतिषाचार्य)
नई दिल्ली










