
नारी आज हर मुकाम पर अच्छा कर रही है,
चाहे देश हो या विदेश, पहचान कर रही है।
कभी घर की जिम्मेदारियों को हँसकर निभाती,
कभी अपने सपनों को आसमान कर रही है।
मेहनत और हौसले से राहें खुद बना रही,
हर मुश्किल को हिम्मत से आसान कर रही है।
अब रुकने का नाम नहीं उसकी इन कदमों में,
हर क्षेत्र में नई उड़ान कर रही है।
नारी की यही कहानी आज दुनिया कह रही,
वह हर मंज़िल को अपने नाम कर रही है।
आर एस लॉस्टम










