
6 महीने से वेतन के लिए सड़कों पर भटक रहे नगरपरिषद कर्मचारी, अध्यक्ष दीपा मिश्रा पर आउटसोर्सिंग-वेतनमान अवरुद्ध करने का गंभीर आरोप
गोमती वालों के साथ कर्मचारियों का दर्द: “हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले अपने कर्मचारियों को तो सैलरी दे दो दीपा जी!”
रामनगर (दैनिक भास्कर संवाददाता): कल से रामनगर क्षेत्र में ‘शांति समृद्धि यज्ञ’ शुरू हो रहा है। वैदिक मंत्रों की गूंज, हवन की पवित्र अग्नि, भक्तों की भीड़… सब कुछ भव्य दिख रहा है। नगरपरिषद अध्यक्ष दीपा मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस यज्ञ में हर श्रद्धालु को कम से कम 21 बार हनुमान चालीसा पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। धोती पहनकर, स्नान करके, पुस्तक लेकर आने वाले भक्तों से अपील की जा रही है कि “धर्म लाभ लो”।
लेकिन सवाल यह है – किसकी शांति? किसकी समृद्धि?
जब नगरपरिषद के सैकड़ों कर्मचारी पिछले 6 महीने से वेतन के लिए दर-दर भटक रहे हैं, उनके परिवार भूखे-प्यासे हैं, तब अध्यक्ष दीपा मिश्रा द्वारा आयोजित यह यज्ञ कर्मचारियों के घाव पर नमक छिड़कने जैसा लग रहा है। सूत्रों के अनुसार, दीपा मिश्रा के कार्यकाल में ही कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के नाम पर ठेकेदारों के हवाले कर दिया गया और पुराना वेतनमान भी अवरुद्ध कर दिया गया। नतीजा – न तो नियमित वेतन, न भत्ते, न पेंशन… सिर्फ खाली जेब और टूटे सपने।
गोमती वाले भी त्रस्त
गोमती क्षेत्र के निवासी (गोमती वाले) भी इस यज्ञ को देखकर हैरान हैं। उनका कहना है – “रामनगर में शांति यज्ञ चल रहा है, लेकिन यज्ञ के नाम पर सतना कैम्प स्थिति बिना अनुमति गोमती हटाई गई क्या यह जायज है। दीपा जी पहले कर्मचारियों को उनका हक दिला दें, फिर हनुमान चालीसा का पाठ करवाएं।”
एक वरिष्ठ कर्मचारी (नाम गोपनीय) ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कटाक्ष करते हुए कहा,
“मंत्रों की आहूति से शांति मिलेगी? हम 6 महीने से सैलरी की आहूति दे रहे हैं! अध्यक्ष जी यज्ञ कर रही हैं, लेकिन हमारे बच्चों की पढ़ाई, दवाइयां, घर का किराया… सब ठप है। क्या यह ‘लोक कल्याण’ है या सिर्फ दिखावा?”
यज्ञ स्थल पर सजावट, कर्मचारी तंगहाली
यज्ञ स्थल को भव्य रूप से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आने वाली है। लेकिन वहीं नगरपरिषद के कर्मचारी कई बार वेतन के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन सुनने वाले कौन है। उन्होंने साफ कहा – “अगर दीपा मिश्रा को लोक कल्याण करना है तो पहले हमारे 6 महीने के बकाया वेतन, और आउटसोर्सिंग के खिलाफ नियम जारी करें। उसके बाद हनुमान चालीसा पढ़ने का निमंत्रण स्वीकार करेंगे।”












