
लिख लिये दिल की बाते,
जो भाव मेरे मन मे है आते,
छंद,रस,अलंकार ना देखें
दोहा,मुक्तक,गजल ना सोचे।
मात्रा,वर्ण, मापनी को छोड़े ,
बस,मन की भाव को पकड़े ,
दिल की बाते,भाव के साथ,
दिल की वेदना,मन के साथ ।
उकेर दी कोरे कागज मे,
और ना तो गा दिये भाव मे,
हो गयी ना कविता,और क्या?
भाव अपनी जता ना,दिया?
आज विश्व कविता दिवस है,
मन मे अति हर्ष है,
सब कवि-कवियत्री जनो को,
पढ़ने वाले शुभचिंतकों को
चुन्नू कवि का नमन है,
हौसलाफजाई हेतु अभिनंदन है,
भूल चूक मेरा,माफ करना,
बस,लिखते रहूँ का,आशीष देना
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड











