
मेरी कविता, आराधन है
सुरसती की,,।।2
मेरी कविता,
कोई उतशृंखल उन्माद नहीं,,।।
मेरी कविता,
कोई फहड़ सा, गा न नहीं
मेरी कविता,,
बाजार में बिकने वाली
ये कोई खैरात नहीं,,,।।1
मेरी कविता, ये किसे कोई
कटाक्ष नहीं,,,।
मेरी कविता ये कोई भी दोष रो प नहीं,,,
मेरी कविता, ये कोई अवसाद नहीं,,।।
मेरी कविता ये कोई दूसरी बात नहीं,,,2
मेरी कविता,
पावन धारा है ,सुरसती की
मेरी कविता, सुमधुर धारा है,,
सु, संस्कारो की,,,।
मेरी कविता प्रेरणा है,
सुविचारों की,,,,
मेरी कविता अविरल धारा है,,
सुगम जीवन पथ ,की,,, ।।3
मेरी कविता, येअभिव्यक्ति है,,, जन-जन की,,, ।
मेरी कविता, ये प्रसादी है,,
सुरसती की,,
मेरी कविता,
यह अविरल धारा है,
मां गंगा की,,,।।4
मेरी कविता,
येआराधन है, मां सुरसती की
राजेंद्र कुमार कुमार तिवारी
मंदसौर ,मध्य प्रदेश











