
कविता भारती का उपहार,
यह संगीत कला का सार।
कविता ज्ञान की पावन धार,
कविता वीणा की झंकार।।
कविता भँवरों की गुंजार,
यह प्रकृति की सुन्दर ठार।
कविता प्यार का है इजहार,
यह सुख दुःख का है सार।।
कविता कलियों की मुस्कान,
यह कोकिल का मधुरिम गान।
कविता बसंत की सुन्दर शान,
कराती कवियों को अमृत पान।।
डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी
विद्या – सागर ” वरिष्ठ कवि “
खुर्जा,, बुलंदशहर ( उ. प्र.)











