
हे जन्मभूमि, हे राष्ट्र भूमि
हे मातृभूमि, तेरा वंदन ।
हे कर्मभूमि हे देवभूमि,
हे मातृभूमि तेरा वंदन। ।2
तेरे इस उजाले मंडल पे
दिन-रात चमकते तारे हैं।
हम बैठे हैं मां तेरे,,
तेरे यश के उजियाले हैं।।2
हम पूत सपूत हैं ,ऐ माते
हम तेरा वंदन करते हैं।
तेरे चरणों में सिर रखकर
हम तेरा अभिनंदन करते हैं,,,,।।
हे जन्मभूमि, हे राष्ट्र भूमि ,,1
गंगा यमुना और सिंधु
तेरा प्रक्षालन करती है।
सभी पुण्य सरिताएं तेरा,
नित पदवंदन करती है।।
सूर्य चंद्र नक्षत्र सभी
तेरा ही वंदन करते हैं।
सभी दिशाओं में रहकर,
तेरा आराधना करते हैं।।
हे जन्मभूमि , राष्ट्र भूमि,,,2
स्वर्ग लोक के सभी देव,
तूझ पर आने को,,,
नीत लाल यित रहते हैं,।
है गौरव मय ऐ पुण्य भूमि,
सब तेरी गाथा कहते हैं।।
हे जन्मभूमि, हे राष्ट्र भूमि,,3
तू धन्य धन्य है जग जननी
हम तेरा वंदन करते हैं,,।
युग युग तक हम तेरे यश की,,
यह मंगल गाथा कहते हैं।।
जन्मभूमि, हे राष्ट्र भूमि
हे मातृभूमि तेरा वंदन।
हे कर्मभूमि ,हे देवभूमि,
हे मातृभूमि तेरा वंदन।।2
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश










