
गर्व से है मस्तक ऊंचा
हम तेरा,,वंदन करते हैं।2
जग जननी मां जगदंबे
हम तेरा अर्चन करते हैं।।2
तू जल थल में,
तू अंबर में,,,2
तू ही है मां,, हर एक कण में2
तेरा वैभव है,
त्रिभुवन में,,,
तू ही है मां,,
मेरे हृदय कमल में,,
जग जननी हे मां जगदंबे,,
हम तेरा वंदन करते हैं,,
गर्व से है मस्तक ऊंचा
हम तेरा बंधन करते हैं,,
मातृत्व भाव जगा दे हे मां
हम सर्वस्व समर्पण करते हैं,,2
हम तेरा वंदन करते हैं
तेरा अभिनंदन करते हैं,,2
हे,मा हे,मा,, जगदंबे,,
हम तेरा अर्चन करते हैं।।2
जग जननी हे मां जगदंबे
हम तेरा वंदन करते हैं,,2
गर्व से है मस्तक ऊंचा
हम तेरा अभिनंदन करते हैं
जग जननी मां जगदंबे
हम तेरा अर्चन करते हैं,,।।
गर्व से है मस्तक उचा
हम तेरा वंदन करते हैं,,
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य










