
आराधना,
जगतजननी जगदायिनी करुणामयी अमृतदायिनी
दिव्य चक्छू ममतामयी आनन्ददायिनी
करती संसार का कल्याण तू
मेरी माँ मोक्षदायिनी
रौद्र का श्रंगार नयनो से निकलती अंगार
करती है माँ दुष्टों का तू संहार
जगत की पालनहार माता तू सुखदायिनी
भजौ माँ अम्वे हर हर
जय जय माँ जय जय शिवशंकर
ओमकार का जाप है
धरती पाताल क्या लोक
सर्वत्र ही तू व्याप्त है
नम:कोटि कोटि नम:
रुद्राणी भद्राणी कमलारानी
तुमको नमन है महारानी
स्वरचित माँ आदिशाक्ति की स्तुति।
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र
या देवी सर्वभुतेषू शक्ति रूपेण बुद्धीरुपेण ज्ञानरुपेण सांस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।










