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मेरा अंतिम सत्य, राम ।।

मन के सब तार टूटे
तन बना खिलौना रे,
आत्म ज्योति चेतन हुई
परम ज्योति लीन रे,,
मन के सब तार टूटे
तन बना खिलौना रे,,,

दुनिया के रिश्ते टूटे
अपने हुए पराए रे,,
सब मिल यश गान करें
देखो, जाए कोई बिरला रे,
मन के सब तार टूटे,,,

प्रणव नाद घोर हुआ
अनहद में एक रे,,,,
सब कोई सोच करें,
ये भी क्या जीव रे,,,,
आत्म ज्योति चेतन हुई
परम ज्योति लीन रे,,
मन के सब तार टूटे,,
तन बना खिलौना रे,,,

साधक से योगी बना
प्रभु मे विलीन रे,,,
संतन का साथ करें
सत्संग में लीन रे,,
आत्म ज्योति चेतन हुई
परम ज्योति लीन रे,,,
मन के सब तार टूटे
तन बना खिलौना रे,,,

ज्ञान चक्शु खुल जाए
तो मिल जाए दीन रे,,
राजन ,कहे स्नेह करो
प्रभु में हो विलीन रे,,
आत्म ज्योति चेतन हुई
परम ज्योति लीन रे
मन के सब तार टूटे
तन बना खिलौना रे,,

राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश

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