
भीषण आग बरस रही है,
चिलचिलाती तेज धूप है,
बेवजह बाहर जाना नहीं,
आँखे चुँधियाना ठीक नहीं।
धधकती लू है, गर्म हवा है,
अल नीनो का झंझावात है,
आसमानी मौत का शमा है,
और जानलेवा यह मौसम है।
ज़िन्दगी अनमोल धरोहर है,
ऊपर वाले की अनोखी देन है,
इसे हमें संभाल कर रखना है,
जिसके लिए घर में ही रहना है।
घर में रहने की आदत डाल लो,
वरना तो फिर पछताना पड़ेगा,
आदित्य गर्म हवाओं से बचकर,
घर में ही सुरक्षित रहना पड़ेगा।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ











