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भक्ति की शक्ति – दोहा

ईश भक्ति की शक्ति है , आत्म शांति की बात।

नाम सदा जपते रहें , दिन हो चाहे रात।।

राम नाम में रम गया,जिस मानव का ध्यान।

मिले भक्ति की शक्ति में, दाता हैं भगवान।।

सराबोर हो भक्ति में , पिघले तम अज्ञान।

हनुमत अपने भक्त को , दीजै यह वरदान।।

राम नाम सुमिरन करें , भक्ति पूर्ण परिवेश।

राम चरित से प्रेरणा , जीवन प्रेम निवेश।।

दया धर्म का मूल है , भक्ति भक्त का प्रेम।

दीन -हीन से प्रेम हो , सदा रहेगी छेम।।

मन में यदि विश्वास है,कभी न मिलती हार।

दिखी भक्ति की शक्ति है,शक्ति जीत आधार। ।

माला लेकर मैं चली, मन मंदिर के द्वार।

मिली भक्ति की शक्ति है ,प्रभु की कृपा अपार। ।

गीता में श्री कृष्ण ने,श्रेष्ठ बताया कर्म।

ज्ञान भक्ति की शक्ति का,बन जाता है धर्म। ।

चरण कमल की वंदना , राम नाम विश्वास।

सिया राम छवि उर बसे , रखिए शुभ की आस।।

सपनों में प्रभु आ गये , धीर धरे अहसास।
यही भक्ति की शक्ति है ,कहता है‌ इतिहास।।


डॉ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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