
ईश भक्ति की शक्ति है , आत्म शांति की बात।
नाम सदा जपते रहें , दिन हो चाहे रात।।
राम नाम में रम गया,जिस मानव का ध्यान।
मिले भक्ति की शक्ति में, दाता हैं भगवान।।
सराबोर हो भक्ति में , पिघले तम अज्ञान।
हनुमत अपने भक्त को , दीजै यह वरदान।।
राम नाम सुमिरन करें , भक्ति पूर्ण परिवेश।
राम चरित से प्रेरणा , जीवन प्रेम निवेश।।
दया धर्म का मूल है , भक्ति भक्त का प्रेम।
दीन -हीन से प्रेम हो , सदा रहेगी छेम।।
मन में यदि विश्वास है,कभी न मिलती हार।
दिखी भक्ति की शक्ति है,शक्ति जीत आधार। ।
माला लेकर मैं चली, मन मंदिर के द्वार।
मिली भक्ति की शक्ति है ,प्रभु की कृपा अपार। ।
गीता में श्री कृष्ण ने,श्रेष्ठ बताया कर्म।
ज्ञान भक्ति की शक्ति का,बन जाता है धर्म। ।
चरण कमल की वंदना , राम नाम विश्वास।
सिया राम छवि उर बसे , रखिए शुभ की आस।।
सपनों में प्रभु आ गये , धीर धरे अहसास।
यही भक्ति की शक्ति है ,कहता है इतिहास।।
डॉ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार











