
घर-घर दस्तक देती टोली |
घर-घर दस्तक देती टोली |
लेकर प्रश्नों की इक झोली ||
नाम पता और उम्र पूछती |
वह पूछती आपकी बोली ||
कितने बच्चे कितनी बेटी |
क्या पढ़ते क्या रोजी रोटी ||
धर्म कौन सा भाषा क्या है |
कितनी दूर केंद्र मत – पेटी ||
कब से रहते इसी पते पर |
कब की बनी तुम्हारी खोली ||
घर-घर दस्तक देती टोली |
एक दशक में ये है होती |
पर विश्वास कभी ना खोती ||
भारत की तस्वीर दिखाती |
जब भी यह जनगणना होती ||
गणना से ही बनें नीतियाँ |
चले न झूठमूठ बड़बोली ||
घर-घर दस्तक देती टोली |
इसे महज गणना मत समझो |
प्रगणक को छलना मत समझो ||
इससे चले देश की धड़कन |
आफत से लड़ना मत समझो ||
दें विवरण सब जनगणना में |
जनता भी अब बने न भोली ||
घर-घर दस्तक देती टोली |
कश्मीर से कन्याकुमारी |
एक सूत्र में गणना सारी ||
शालाएं, अस्पताल कितनी |
ताल कुंए नल बिजली भारी ||
गणना के रंगों से सजती |
भारत माँ की नई रँगोली ||
घर-घर दस्तक देती टोली |
अलग – अलग भाषा भाषी हैं |
फिर भी सब भारत बासी हैं ||
बने महान देश हम सब का |
जिसके सब अब अभिलाषी हैं ||
अब “संतोष” प्रगति के पथ पर |
जनता खुद ही शामिल हो ली ||
घर-घर दस्तक देती टोली |
संतोष नेमा “संतोष”











