
कविता
मौलिक रचना
मैं हूँ पक्षी मित्र—दाना, पानी, प्यार,
नन्हें पंखों में बसता मेरा संसार।
न काटो वन, न छीनो उनका घर,
चहकेंगे तो ही महकेगा ये शहर।
आओ मिलकर एक संकल्प लें,
हर आँगन में पक्षियों को ठौर दें।
प्यासे हों जब तपता दोपहर,
एक कटोरी जल रखो हर डगर।
सूनी डाली फिर गीत सुनाए,
जब स्नेह का दीप हम जलाए।
धरती-आकाश का यही है नाता,
पक्षी बिन सूना हर एक गाता।
मैं नहीं—हम सब बनें प्रहरी,
पंखों की मुस्कान रहे गहरी।
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़











