
प्रारंभी नेह:
श्री किशोरी राधा रानी का, रूप सौंदर्य अद्भुत है ।
प्रेम से जब देखे भक्तों को, मुग्ध माधुर्य अद्भुत है।।
नीलाम्बर चेहरे पर गिरता, कमल नयन से नेत्र है ।
आभूषणों की सुंदरता का, ढंग ऐश्वर्य अद्भुत है।।
मनोहरिणी की सुंदरता का, ना हो सकता बखान कहीं।
ना शब्द ना नेत्र कह सकते, रूप आश्चर्य अद्भुत है।।
ब्रज की अधिष्ठात्री देवी, जिस पर भी हो जाए प्रसन्न ।
कृष्ण भक्ति से हृदय भरती, सरल औदर्य अद्भुत है।।
बरसाती अपनी कृपा भक्तों पर, देती अभय का दान है ।
जो चाहे वह मिलता दर पर, उनकी सामर्थ्य अद्भुत है।।
नवं नवं वे हर दिन दिखती, लाल जी के मन भातीं।
गोपियाँ भी एक टक देखें, ऐसा अमर्त्य अद्भुत है।।
प्रेम करें श्री कृष्ण लाल से, तन मन में केवल कृष्ण बसे।
भरतार केवल कृष्ण है उनके, फिर भी सहचर्य अद्भुत है।।
कभी न जीते कृष्ण लाल जी, चरणों में बैठें उनके।
ललिता, विशाखा, सखियों संग, उनका चातुर्य अद्भुत है।।
भृकुटी से जगदीश्वर चलते,बात ना उनकी टालें कभी ।
प्रसन्न कर लो किशोरी जी को, कृष्ण नाम का देती जाप,उनका नैरंतर्य अद्भुत है।।
परिचयी नेह:
‘वृंदा’ राधा नाम पुकारे, कृष्ण का देंगी दान वही।
कृष्ण नाम की जोत जलाती, रूप ज्योतिर्मय अद्भुत है।।
हरि बोल!!!
सारिका शर्मा ‘वृंदा’
ओमान मस्कट











