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निर्वाण की खोज में

(बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष)


इस धरा पर जन्म पाया मनुज रूप में
हुई निश्चित कुछ विधाएं जीवन के नित
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राज्य धर्म, पुत्र धर्म, पति धर्म और पिता धर्म भी न रोक सका
चल पड़े शाश्वत सत्य की खोज में
बीमारी, बुढ़ापा और मृत्यु की सच्चाई जानने
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निर्वाण तो पा लिया, जीवन मर्म भी पा लिया
पर क्या इस सत्य ने उन सवालों का जवाब दे सकने का मर्म बताया
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जो सवाल प्रजा, माता-पिता, पत्नी और पुत्र के मन में थे
क्या निर्वाण पाने की सजा मिली उन सब को
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बहुत से इन प्रश्नों का जवाब अभी बाकी है!
यशोधरा, राहुल, सदियों तक रहेंगे अपने अनुत्तरित प्रश्नों की फेहरिस्त लिए
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कई लोगों का एक पूरा जीवन भी प्रतिफल चाहता है इस असीम प्रश्न और प्रसन्नता का ?
शायद इसी लिए भगवान बनना आसान है, बजाय मानव रूप की प्राथमिकताएं सिद्ध करने के।
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सरोज बाला सोनी
कवयित्री

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