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अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस


एक मजदूर का दर्द
1 मई 1886 मजदूर दिवस स्थापना की भूमिका ।
1 मई 1889 मजदूर दिवस को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता।
(इस दिन पर कुछ दिल को छूने वाली कुछ पंक्तियाँ)
दुनिया भर में आज मजदूर, दिवस मनाया जाता है।
मेहनत कश मजदूरों के योगदान का,
जश्न मनाया जाता है।
क्या हमने कभी उन मजदूरों को,
जरा गौर से देखा है।
सुनने में जो शब्द, लगता बहुत ही छोटा है।
शहरों के हर चौराहों पर, लगता मजदूरों का मेला है।
कभी उन राहों से गुजरते, उनकी आँखों में देखा है।

पैरों में टूटी चप्पल है, तन पर मैला सा कपड़ा है।
वो टूटी चप्पल भी मानो, उसको महंगी लगती है।
वो उसका कपड़ा और चप्पल, उसकी कहानी कहते हैं।

रोज सुबह बस एक आँस से, वो घर के बाहर जाता है।
मन में एक अंजाना सा डर, उसके बैठे जाता है।
नहीं मिला यदि मुझे काम तो,
कैसे होगी जरूरत परिवार की पूरी।

एक ही डर, बस उसको सताता रहता है।
शहरों की इस चमक धमक को,
बस वो देख ही सकता है।
फल सब्जी की सजी दुकानें देख,
मन उसका भी ललचाता है।

परिवार को कभी खिलाने तो कभी खुद,
खाने को बस सोचा करता है।
बिल्डिंग और महल तो सबने देखे,
क्या मजदूरों के घर को किसी ने देखा है।

उठा नजरें इमारतों की,
तारीफें सभी तो करते हैं।
उन इमारतों के नीचे दबी,
नींव को किसने देखा है।
मजदूर तो नींव की वो ईट है,
जिसपर महल तेरा मजबूत खड़ा है।
क्या मजदूर को सबने देखा है?

रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)

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