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विनयान्जली


जीवन के
अपरान्ह काल मे
आज,,
क्षमा भाव मे
कहता हूं ।

चाहे हुई हो,
कोई भूल चूक,
जाने अनजाने में,,
स्वीकार उसे में करता हूं।1

करता अभिवादन, वंदन
अभिनंदन हो, नतमस्तक,
करबद्ध स्तवन में करता हूं।
हूं कृतज्ञ में, द्रवित हृदय से,,,
आभार व्यक्त में करता हूं।।2
जीवन के अपरान्ह काल में,,

बस ,चाहता यही मंगल आशीष,,
शेष जीवन का,
आप सभी से,, ,,,
मैं नित पदवंदन करता हूं,
हो जाऊंगा, मैं भी कृतार्थ,
धन्य धन्य,,,,
पाकर शुभा,
आशीष आप सभी का,
यह विनयान्जली में करता हूं,,,।।3

जीवन के अपरान्ह काल में
आज क्षमा भाव में कहता हूं,,,।
चाहे हुई हो ,कोई भूल चूक
जाने अनजाने में,,
स्वीकार उसे में करता हूं,,।।

राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर ,मध्य प्रदेश

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