
एक खूब सूरत बगीचा होता
इसे देखने केलिए लोग आता
रंग बिरंगी फूल से शोभित होता
हरियाली से बगीचा सुंदर लगता
लेकिन भीड़ में मेरा मन अकेला हो।
आराम पाने केलिए आता लोग
ठंडा हवा लेने केलिए आता लोग
बात चीत करने केलिए आता लोग
मन को उल्लास केलिए आता लोग
लेकिन भीड़ में मेरा मन अकेला हो।
बच्चों से लेकर बूढों तक आता है
हर दिन बगीचा में कोलाहल होता है
मन पसंद के अनुसार खेल खेलता है
बीच में कुछ चीजों खाता फिरता है
लेकिन भीड़ में मेरा मन अकेला हो।
श्रीनिवास यन, आंध्रप्रदेश












