
दिल का टुकड़ा
वह तो दिल का टुकड़ा था
दिल के टुकड़े का मो़ल क्या है ?
दिल के समंदर में बुलबुले का मोल क्या है?
बुलबुले है तो क्या हुआ बुलबुले ही समंदर बनाते हैं
मां की ममता ऐसे नहीं हारती
समदंर पीकर भी अपने दिल के टुकड़े को को बचाती !
राम वल्लभ गुप्त इंदौरी











