भगवान बुद्ध ने बतलाया,
जीवन जीने का मार्ग सरल,
शांति, ज्ञान, करुणा से ही,
निकलेंगे सभी द्वंद के हल।
लुंबिनी वन में जन्म हुआ,
रानी महामाया कोख से,
राजा शुद्धोधन हर्षित हो,
साधु बुलाए हर छोक से।।
पुत्र देखकर संन्यासी ने,
शंकित होकर नृप से कहा।
या होगा चक्रवर्ती राजा ये,
या होगा संन्यासी महा।।
कपिलवस्तु में बीता बचपन,
वैभव, सुख, सब कुछ पास,
यशोधरा संग विवाह हुआ,
फिर भी मन में रहा उदास।
राहुल का भी जन्म हुआ,
पर मन वैराग्य में डोला,
जीवन के दुःख देख-देखकर,
अंतर का हर भाव बोला।
रात अंधेरी, त्याग दिया सब,
राजमहल और अपना घर,
ज्ञान की खोज में निकल पड़े,
बन कर संन्यासी पथ पर।
कठिन तपस्या, ध्यान साधना,
वट बोधि वृक्ष तले पाया ज्ञान,
चार आर्य सत्य बतलाकर,
बुद्ध ने दिया जग को सच्चा ज्ञान।
अहिंसा,दया संग मध्यम मार्ग,
ही जीवन का सच्चा आधार।
बुद्ध वचन हमें सिखलाते,
शांति से ही होता उद्धार।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश













