
मैं अच्छी हूँ या बुरी हूँ माँ,
ये तो बस आप ही जानती हो,
मेरी हर खामोशी के पीछे
छुपी पीड़ा पहचानती हो।
आपके लिए क्या लिखूँ मैं माँ,
आपकी ही तो लिखावट हूँ मैं,
आपके आँचल की छाया में पली
एक छोटी-सी इबादत हूँ मैं।
जब दुनिया ने उँगली उठाई,
आपने हर बार संभाला है,
मेरे टूटे मन को माँ
बस आपने ही तो संभाला है।
मेरी हँसी में आपकी खुशबू,
मेरे आँसू आपकी पीड़ा हैं,
मैं जो भी हूँ, जैसी भी हूँ,
माँ, बस आपकी तस्वीर हूँ।
आपने भूखी रहकर अक्सर
मेरी थाली सजाई है,
अपने सपनों को खोकर भी
मेरी दुनिया बसाई है।
माँ, आपके चरणों की धूल भी
मेरे लिए वरदान है,
तेरी ममता के आगे फीका
सारा ये संसार है।
अगर मुझमें अच्छाई है,
तो वो आपके संस्कारों से है,
और जो थोड़ी कमियाँ हैं,
वो इस दुनिया के वारों से हैं।
आपके लिए क्या लिखूँ मैं माँ,
शब्द सभी छोटे पड़ जाते हैं,
जिस माँ ने जीवन दिया हो,
उसके ऋण कहाँ चुक पाते हैं।
बस इतना कहना चाहूँगी
हर जन्म में आपका साथ मिले,
आपकी गोदी, आपकी ममता,
और आपका ही आशीर्वाद मिले।
नेहा कुमारी अखनूर जम्मू कश्मीर













