
दायरे में रहकर हम सभी को काम करते रहना चाहिए।
अपनी निश्चित सीमाओं का पूरा ध्यान रखना चाहिए।।
दायरे का उल्लंघन कभी मत कीजिए।
केवल संतुलित आहार नियम से लीजिए।।
आपसी सहमति से ही काम किया कीजिए।
इस तरह आप सुंदर जीवन जिया कीजिए।।
दायरे में रहने वाले ही सदा अनुशासन रखते हैं।
बेवज़ह या बेकार में समय व्यतीत नहीं करते हैं।।
अपनी चादर के मुताबिक ही ज़िंदगी जिया करते हैं।
कभी व्यर्थ में बोलकर अपशब्दों का प्रयोग नहीं करते हैं।।
दायरे में रहकर भी जीवन जी लिया जाता है।
इंसान अधिकतर बेकार में ही इतराता है।।
समय निकल जाने पर वह बहुत पछताता है।
उसके कर्मों का फल ही उसके सामने आता है।।
बोलते समय अपने दायरे का ख़्याल रखा जाए।
कड़ी मेहनत का ही आखिर स्वाद चखा जाए।।
कभी किसी भी तरह के विवाद में न पड़ा जाए।
किंतु अपने हक के लिए हर बार अड़ा जाए।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













