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माँ

मां से सृष्टि का सृजन होता
नवजीवन कि वह शिल्पकार।
समस्त पवित्र संबंधों की निर्माता
वात्सल्य की छाया अनुपम है स्नेह अपार।

निस्वार्थ सेवा का प्रतिबिंब
करुणा से भरी एक भाषा मां ।
संस्कारों की है प्रथम पाठशाला
संतान के लिए पूर्ण समर्पित मां।

ऐसा व्यक्तित्व जो संतान को
दुनिया से नौ महीने अधिक जानती।
स्नेहमयी आंचल में रखकर उसको
दुनिया के हर संकट से दूर रखती।

उर्मिला ढौंडियाल ‘उर्मि’
देहरादून (उत्तराखंड)

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